लगन के गीत

उबटना

उबटना-1
लाडो आया है हल्दी रा पोट, जै कोई मोल ले,
मुलाए लाडलडी रो दादा जी, दादी के मन बसे - 2
मुलावे लाडलारी रे ताऊ जी, ताई के मन बसे ।
लाडो पिठलडी दिनचार, मल-मल नहाय ले ।
लाडो महेदडली दिन चार, हाथ रचाय ले ।
लाडो काजलिया दिन चार, नैन धुलाय ले ।
लाडो चावलिया दिन चार, रूच-रूच जीम ले ।
लाडो पीहरिया दिन चार या रूत मान ले
माई और बाप, हरख घणी करे।
लाडो जीओ थारा सब, परिवार हरख घणा करे ।
जुग-जुग तेरे बाबा हल्दी मोल लिए।
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उबटना-2
जौ ऐ मूंगा का उबटना, राऐ चमेली का तेल, हथलाड़ो बैठी उबटना,
आओ मेरे दादा जी देख लो, आओ मेरे ताऊ जी देख लो,
थानै घणै रोड़ा चाव, हथ लाडो बैठी उबटना
थाम देखा सुख होए, हथ लाड़ो बैठी उबटना
मलै झड़-झड भू पडै़, नूर चढ़ै थारे अंग
हथ लाडो बैठी उबटना, जोये मूंगा का उबटना
जामी जी, चाचा जी, फूफा जी, भाई जी
नहाने का गीत
म्हारै आँगण किचला बै, किन डोला पानी
म्हारी हथ लाड़ो नहाई बे, नाँण डोला पानी
म्हारा हथ लाड़ो नहाया बे, नाई डोला पानी,
आइ बनड़ै की भाभी ढह पड़ी, बे उसकी टांगे न ताणी
टाँग न तानी के करूं, बे गोड पड़ गया पानी,
पड़ी ये पड़ी ललकार बे जानू बिल्लो रानी
मोरी मै को निकली बै, जानू सामण का पानी,
दमड़-दमड़ कुटियों बे, जानू धान की घाणि
भैंसां मैं को निकली बे, जानू गयाबण झोटी
छाबा ऊपर फैंकिये बे, जानू लाय पुराणि
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गीत बान का पट्टा
कइयों री उस खाती कै लडकै नै खाती के लडकै नै
पाटा तो ल्यावै मेरे लाल न राऐ रतन सिंग नै
राए रतन सिंह नै छेल बदन सिंग लै और मथुरा के लाल नै
कइयों री उस सुनरै के लडके नै सुनरै के लडके नै
डोरा तो ल्यावै मेरे राए रतनसिंग ने
राए रतन सिंग ने छैल बदन सिंग मथुरा जी के लाल नै,
कईयों री उस माली के लडकै नै माली के लडके नै
सेहरा तो ल्यावै मेरे राए रतन सिंग नै
राए रतन सिंग नै छैल बदन सिंग ने मथुरा जी कै लाल नै
कइयों री उस मामा सहजादा ने मामा सहजादा नै
जामा तो ल्यावै मेरे लाल का राए रतन सिंग नै
राए रतन सिंग नै छैल बदन सिंग नै मथुरा जी के लाल ने
कइयों री उस मोची के लडके नै, मौची के लडकै ने,
जूता ता ल्यावै मैरे राए रतन सिंग ने
राए रतन सिंग के नै छैल बदन सिंग ने मथुरा जी कै लाल नै
कइयों री उस समधी भड़वै नै समधी भड़वे ने
कन्या तो देवै मेरे राए रतन सिंग नै
राए रतन सिंग नै छैल बदन सिंग नै मथुरा जी के लाल नै
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लड़की का गीत
हल खल हल खल नदी ऐ बहवै, म्हारी बुगली मल मल नहावै जी
बुगली नहाये राये जादी, गर बखत मत नहाओ जी,
गर बखत बल सियो ऐ पडत है, दो फारै बल नहाईयों जी,
दो फारै बल धुप पड़त है, साँझ पड़ी बल नहाईयो जी,
लाडो नहाये धोये बैठी मजोट, के आमण घुमणी ।
लाडो के मॉगे गल हार, के बल-बईया चुडला
मै तो बल मांगु गल हार, बल-बईया चुडला
मै तो मॉगु साजनीयारा पूत, वो म्हारै मन चढा
लाडली कहां ये देखा साजनीया रा पुत, कहां थारै मन चढा
सहईयों देखा स्कुलॉ कै बीच, वो म्हारा मन चढा
सहईयों देखा सुहेलीयां के साथ, वो म्हारे मन चढा
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लड़के का गीत
हल खल हल खल नदी ए बहवै, म्हारा बुगली मल मल नहावै जी,
बुगली गोद पसारयो रायजादी, गैर बखत मत नहावो जी,
गैर बखत बल सियो ए पड़त है, दो फौरे बल नहावो जी,
दोफारै बल घूप पडत है, साँझ पड़ै बल नहावो जी,
कोन्या जीरी रतन कचोली, कोन्या जीरा मोतीड़ा रो हारो जी,
समधी जीरी रतन कचैली, बाबुल जीरो मोतिड़ा रो हारो जी
दिन्या है म्हे मोतिड़ा रो हारो, लीन्ही है म्हे रतन कचैड़ी जी
हार सोवै म्हारै हिवड़े गै ऊपर, मोतिड़ा तपे ए लीलारी जी
आँगनियाँ फिरैगी म्हारी रतन कचैली, निरखै म्हारा मोतिड़ा रो हारो जी,
भात परोसे म्हारी रतन कचैली, जीमे म्हारी मोतिड़ा रो हारो जी
सेज बिछावै म्हारी रतन कचैली, पौडे म्हारा मोतीड़ा रो हारा जी
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